राजा की नंगई बनाम जं जी की भाषा

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से लेकर एक लंबी कतार है जंतर-मंतर पर जं जी की भाषा से आहत लोगों की। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी तो इतने आहत हुए कि जं जी को बिना माफी मांगे माफीनामा जारी करने लगे। लेकिन अगर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने गिरेबां में जरा सा भी झांक लिया होता तो जं जी से माफी मांगते। लेकिन दिक्कत ये है कि वे अपने गिरेबां में नहीं दूसरों के बाथरूम और बेडरूम में झांकने में यकीन रखते हैं ! एक नजर डालते हैं देश के कुछ चुनिंदा नेताओं, पूंजीपतियों और धर्मध्वज थामे तथाकथित धर्माचार्यों की टिप्पणियों पर।
नरेन्द्र दामोदर दास मोदी (प्रधानमंत्री) – – लोकसभा चुनाव अभियान 31 मार्च 2004 अहमदाबाद रैली – – “सोनिया गांधी एक जर्सी गाय है और राहुल गांधी एक हाईब्रीड बछड़ा है” । 2012 हिमाचल प्रदेश में चुनावी रैली – – “सुनंदा पुष्कर (शशि थरूर की दिवंगत पत्नी) 50 करोड़ की गर्लफ्रेंड है”। 2021 पश्चिम बंगाल में चुनावी रैली में ममता बनर्जी को अश्लील लहजे और इशारे में कहा गया” दीदी-ओ-दीदी”। प्रहलाद जोशी (शिक्षा मंत्री) – – बिलकिस बानो प्रकरण (गुजरात के दाहोद जिले के रंधीकपुर/छप्परवाड इलाके में जब पांच माह की गर्भवती बिलकिस बानो के साथ सामूहिक बलात्कार किया गया और उसकी तीन साल की बेटी सालेहा समेत परिवार के चौदह सदस्यों, जिनमें महिलाएं और बच्चे शामिल थे, की हत्या कर दी गई। उस मुकदमे में दोषियों को जमानत मिलने पर 18 अक्टूबर 2022 – “मुझे इसमें कुछ भी गलत नहीं लगता क्योंकि यह कानून की प्रक्रिया है। जेल में काफी समय बिताने वाले दोषियों की रिहाई के लिए कानून में प्रावधान है” । 2023 कर्नाटक विधानसभा चुनाव के दौरान – – “गावों में बिजली की कमी के कारण जनसंख्या बढ़ती जा रही है क्योंकि रात में लोगों के पास करने को कुछ नहीं होता, इसलिए आबादी बढ़ गई”।
सी के राउल जी – – (गुजरात में बीजेपी विधायक, बिलकस) बानो मामले वाली कमेटी के सदस्य) अगस्त 2022 में 11 दोषियों की रिहाई पर कहा – – “वे ब्राम्हण हैं। ब्राम्हणों के संस्कार अच्छे होते हैं। मुझे नहीं पता कि उन्होंने अपराध किया या नहीं लेकिन उनका आचरण अच्छा था”। टी जी मोहनदास (केरल के दक्षिणपंथी टिप्पणीकार, आरएसएस से जुड़ाव, भाजपा के पूर्व बौध्दिक प्रकोष्ठ संयोजक) जुलाई 2026 (जंतर-मंतर पर नीट पेपर को लेकर जं जी और सीजेपी द्वारा किए गए आंदोलन पर टिप्पणी”………. गैंगरेप होंगे। इस मामले में कोई शिकायत नहीं होगी क्योंकि ये लोग बलात्कार पसंद करने वाले है। कुछ महिलाएं ऐसी हैं जिन्हें बलात्कार पसंद है, खासकर वामपंथी, सेकुलर, डेमोक्रेटिक और सर्वहारा वर्ग की महिलाएं। अगर इस दौरान कोई मर भी जाए तो वे उसे शहीद बना देंगे यदि वे जिम्मेदार होते, तो कर्फ्यू लगाकर प्रदर्शनकारियों पर फायरिंग का आदेश देते”। दयाशंकर सिंह (उत्तर प्रदेश बीजेपी नेता) – 2016 मायावती पर टिप्पणी – -“एक वेश्या भी पैसे लेने के बाद अपना कान्ट्रेक्ट पूरा करती है, लेकिन मायावती सबसे ज्यादा पैसा देने वाले को टिकिट बेच देती है। वे एक वेश्या से भी बदतर हो गई है”।
आशा मिर्जे (महाराष्ट्र राज्य महिला आयोग सदस्य) – – जनवरी 2014 में निर्भया कांड और मुंबई शक्ति मिल्स रेप कांड पर टिप्पणी – -” क्या निर्भया को रात 11 बजे दोस्त के साथ फिल्म देखने जाना जरूरी था”? “शक्ति मिल्स वाली लड़की अकेले ऐसी सुनसान जगह पर शाम 6 बजे क्यों गई”? मनोहर लाल खट्टर (हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री) – – 2014– “अगर लड़की मर्यादा में कपड़े पहने तो लड़का गलत नजर से नहीं देखेगा। अगर आजादी चाहिए तो नंगे क्यों नहीं घूमते ? आजादी की भी सीमा होनी चाहिए “। संजय निषाद (उत्तर प्रदेश कैबिनेट मंत्री – बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा एक महिला का हिजाब हटाने पर टिप्पणी) – -“वो भी तो आदमी हैं… नकाब छू दिया तो क्या हो गया ? अगर कहीं और छू देते तो क्या हो जाता”? मुलायम सिंह यादव (उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री) – – अप्रैल 2014 मुरादाबाद रैली में बलात्कार के मामलों में मौत की सजा पर टिप्पणी – – “लड़कियाँ पहले दोस्ती करती हैं। लड़के लड़की में मतभेद हो जाता है। मतभेद होने के बाद उसे रेप का नाम दे देती हैं… लड़कों से गलतियां हो जाती है”। चौधरी लाल सिंह (तत्कालीन जम्मू कश्मीर में भाजपा मंत्री – हिन्दू एकता मंच की रैली में कठुआ रेप मामले में जिसमें एक आठ साल की मुस्लिम लड़की आसिफा बानो का अपहरण, मंदिर में रखकर सामूहिक बलात्कार और हत्या पर टिप्पणी) – -“इस लड़की की मौत पर इतना हंगामा क्यों ? यहां कई लड़कियां मरती रहती हैं”। कविंदर गुप्ता (जम्मू कश्मीर विधानसभा स्पीकर) कठुआ मामले पर टिप्पणी – – “रसाना एक छोटी सी बात है… इस मामले को इतनी अहमियत नहीं देनी चाहिए”।
कंगना रनौत (बालीवुड अभिनेत्री, भाजपा सांसद) – – 27 जुलाई 2026 – -“भारतीय महिलाओं की एक नई पीढ़ी है, मैं उन्हें जनरेशन गटर कहती हूं – – पढ़ाई में अच्छी नहीं हैं, लेकिन इतनी बदसूरत और भृष्ट हैं कि गृहणी भी नहीं बन सकती। फिर भी वे गर्व से स्वतंत्रता का प्रदर्शन करती हैं–नशे, शराब या अनगिनत बाॅडी काउंट के साथ, और बेशर्मी से अपने माता पिता की कमाई पर जीती हैं”। 2020 (किसान आंदोलन की बुजुर्ग महिला बीबी महिंदर कौर की फोटो लेकर टिप्पणी) – -“यह वही दादी है जो 100 रुपये में परफार्मेंस के लिए उपलब्ध है”। रिहाना पर 2021 किसान आंदोलन के दौरान लिखा – -“वह सुनिधि चौहान या नेहा कक्कर जैसी ही गायिका हैं। वह गाना गाते समय अपने नितंब हिला सकती हैं और कैमरे के सामने अपनी गां…. की दरार दिखा सकती हैं।
हां बस इतना ही और कुछ नहीं”। नितीश कुमार (तत्कालीन मुख्यमंत्री बिहार) – – 7 नवम्बर 2023 बिहार विधानसभा के भीतर – -“एक आदमी और एक औरत की जब शादी होती है तो आदमी औरत के साथ रोज रात को सैक्स करता है और उसी में बच्चा पैदा हो जाता है, लेकिन लड़की जब पढ़ लेती है तो वह समझदार हो जाती है। तो वह लड़के को कहती है कि यह यो… के भीतर स्ख… ना हो बल्कि वी… निकलते समय लड़का अपना पे…. यो…. से बाहर निकाल ले। तो ऐसे में लड़की के गर्भवती होने के चांस कम हो जाते हैं और जनसंख्या घटने लगती है”। नितीश कुमार ने केवल कहा नहीं बल्कि बकायदा हाथ के इशारे से भी समझाया भी कि पुरुष अंदर ना गिराये बाहर निकाल दे।
आजम खान (सपा नेता) – – जुलाई 2019 लोकसभा में सभापति पद पर बैठी भाजपा सांसद रमा देवी पर टिप्पणी – -“आप मुझे इतनी अच्छी लगती हैं कि मेरा मन करता है कि आपकी आंखों में आंखें डाले रहूं”। लालू प्रसाद यादव (पूर्व मुख्यमंत्री बिहार) – – बिहार की सड़कें हेमामालिनी के गालों जितनी चिकनी बना देंगे”। राकेश झुनझुनवाला (उद्योगपति) – -“2013 इकाॅनामिक टाइम्स को दिए गए इंटरव्यू में महिलाओं को लेकर टिप्पणी की – – मार्केट्स महिलाओं की तरह हैं हमेशा कमांडिंग, हमेशा मिस्टीरियस, हमेशा अनसर्टेन, हमेशा वोलाटाइल और हमेशा एक्साइटिंग”। कैलाश विजयवर्गीय (भाजपा नेता) – – 25 सितम्बर 2025 को मध्य प्रदेश के शाजापुर की जनसभा में राहुल गांधी-प्रियंका गांधी (भाई-बहन) के गले मिलने पर टिप्पणी – -“हमारी पुरानी संस्कृति के लोग हैं। पुराने जमाने के लोग अपनी बहनों के गांव का पानी तक नहीं पीते थे लेकिन आज के प्रतिपक्ष के नेता अपनी बहन का चौराहे पर चुंबन कर लेते हैं । यह संस्कारों का अभाव है। यह विदेशी संस्कार है”। रमेश विधूड़ी (भाजपा सांसद) – – जनवरी 2025 दिल्ली के कालका जी में चुनावी सभा – -“वह वहां की सड़कों को प्रियंका गांधी के गालों जैसी चिकनी बना देंगे”।
आशाराम बापू (स्वयंभू ईश्वर और बलात्कार केस में सजायाफ्ता) – – निर्भया कांड पर की गई टिप्पणी – – ” केवल 5-6 लोग दोषी नहीं हैं। पीड़िता बेटी भी उतनी ही दोषी है – उसे चाहिए था कि हमलावरों को भाई कह कर विनती करती और रुकने की भीख मांगती – इससे उसकी इज्जत और जान बच जाती। क्या एक हाथ से ताली बजती है ? मुझे नहीं लगता। अगर लड़की सरस्वती मंत्र जपती या गुरु दीक्षा लेती तो बाॅयफ्रेंड के साथ फिल्म देख कर बस में नहीं चढ़ती”। अनुरुध्दाचार्य (पूवी बाबा) – – जुलाई – अक्टूबर 2025 के आसपास वृंदावन में प्रवचन के दौरान कहा – -“अब लड़की लाते हैं 25 साल की। 25 साल की लड़की चार जगह मुंह मार चुकी होती है (सब नहीं पर बहुत) और वह पूरी जवान होकर आती है तो स्वाभाविक है कि उसकी जवानी कहीं फिसल जाएगी”। इसके पहले कहा था “लड़कियों की शादी 14 साल में कर देनी चाहिए”। बाबा बागेश्वर (धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री) – -” शादीशुदा महिलाओं की दो पहचान होती है – मांग में सिंदूर और गले में मंगलसूत्र। अगर इनके पास यह नहीं है तो आप समझते हैं यह प्लाट उपलब्ध है”।
सवाल है कि क्या किसी प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, मंत्री, उद्योगपति, धर्माचार्य को ऐसी भाषा शोभा देती है ? प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जिस तरह की टिप्पणियाँ की हैं वह केवल सेक्सिस्टन नहीं बल्कि जेनोफोबिक (विदेशी, बाहरी लोगों या अलग संस्कृति, नस्ल के लोगों के प्रति घृणा, भय, पूर्वाग्रह रखने वाली) और स्त्री विरोधी सोच है। प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री का पद संवैधानिक और प्रशासनिक गरिमा का प्रतीक है। जनता ने उसे सड़क, बिजली, पानी, रोजगार, सुरक्षा के लिए चुना है ना कि विरोधियों की पत्नी की कीमत आंकने के लिए। प्रधानमंत्री की कुर्सी पर बैठ कर भी नरेन्द्र दामोदर दास मोदी ने ने दिखा और बता दिया है कि उनकी सत्ता पुरुष प्रधान मानसिकता का प्रतीक है। जिसमें महिला चाहे मंत्री हो या मुख्यमंत्री, विधायक हो या सांसद, पार्टी पदाधिकारी हो या साधारण कार्यकर्ता उससे कोई फर्क नहीं पड़ता है आखिर में वह केवल और केवल एक महिला से ज्यादा कुछ नहीं है।
इनके शब्द सिर्फ शब्द नहीं हैं वह सत्ता के नशे में डूबी संवेदनहीन सोच का दस्तावेज़ है। इनकी टिप्पणियाँ मानवता के मुंह पर करारा तमाचा है। इनके बयान किसान, मजदूर, ग्रामीण महिलाओं, गरीब परिवारों, हर उस इंसान का अपमान है जो बिजली, पानी, सड़क, रोजगार के अभाव में जी रहा है। बलात्कारियों के समर्थन में खड़े होने वाले तनिक सोचें कि यही बलात्कारी अगर उनके परिवार की बहू, बेटी, बहन या किसी महिला के साथ रेप करते हैं तो क्या वे ऐसी ही प्रतिक्रिया व्यक्त करेंगे। महिलाओं को बलात्कार पसंद करने वाली कहना और प्रदर्शनकारियों को गोली मारने की वकालत करना यह सिर्फ व्यक्तिगत पतन नहीं बल्कि पूरे संगठन की मानसिकता पर प्रश्न चिन्ह है। क्या यही भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का संस्कार और राष्ट्रवाद है ? रामराज्य और हिन्दू राष्ट्र की यही परिकल्पना है ?
वेश्या और वेश्या से बदतर शब्द का उच्चारण करना औरत को इंसान नहीं बाजार में बिकने वाली चीज समझना है। उसकी नजर में औरत का पूरा वजूद सिर्फ देह और पैसे से आंका जा सकता है फिर चाहे वह उसकी अपनी बहन, बेटी, पत्नी, मां ही क्यों ना हो। कपड़ोंं से औरत की गरिमा, संस्कार या चरित्र को तौलने वालों को क्या अपने घरों की मां, बहन, बेटी, बहू का बलात्कार होना स्वीकार्य है ? नितीश कुमार की पैरवी करने वाला तब भी ऐसी ही पैरवी करता क्या जब नितीश ने उसकी मां, बहन, बेटी, पत्नी का पल्लू खींचा होता ? मुलायम सिंह यादव का बयान बलात्कार संस्कृति का खुला समर्थन करने वाला है जहां अपराधी बच जाता है और पीड़िता को शर्मिंदा किया जाता है। जम्मू कश्मीर के भाजपाईयों के बयान ना केवल असंवेदनशील हैं बल्कि नरभक्षी मानसिकता का सार्वजनिक प्रदर्शन है। पीड़िता की मौत इसलिए मायने नहीं रखती क्योंकि वह मुस्लिम है। यह सिर्फ और सिर्फ साम्प्रदायिक नफरत की खुली राजनीति है जिस पर खड़े होकर भारतीय जनता पार्टी अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकती है।
जं जी को गटर छाप कहना जहरीली रूढ़िवादिता को मजबूत करता है। एक बुजुर्ग महिला को 100 रुपये में उपलब्ध होने को कहना विशुद्ध रूप से बौध्दिक दिवालियापन और गिरी हुई मानसिकता दोनों को एक साथ उजागर करता है। जिनका जमीर ही पैसा हो उनके लिए रिश्ते की कोई अहमियत नहीं होती है। एक औरत का दूसरी औरत के लिए अश्लील शब्दों का प्रयोग औरत के नाम पर कलंक ही है। नितीश कुमार की सोच महिलाऒ को सिर्फ प्रजनन और जवानी की वस्तु मानती है। सार्वजनिक मंचों से इस तरह की भाषा का इस्तेमाल लोकतंत्र और शालीनता दोनों का अपमान है। इस तरह का बयान बताता है कि सत्ता और सड़क की राजनीति में भी महिलाओं को वस्तु की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है। पैसे वाले पुरुषों के लिए स्त्री एक उत्पाद के अलावा और कुछ नहीं है। वह मनोरंजन का एक साधन है जो सिर्फ मर्दों के लिए वासना का साधन मात्र है।
बीजेपी के नेताओं ने अनेकों बार महिलाओं का वस्तुकरण कर चुनावी मंचों को अभद्र और बाजारू बनाया है। माना कि राजनीतिक नेताओं का चारित्रिक पतन हो चुका है लेकिन खुद को धर्म का ठेकेदार बताने वाले तथाकथित धर्माचार्यों के बयान भी पितृसत्तात्मक सोच वाले ही होते हैं और उनकी नजर में महिला की इज्जत और पहचान उसके शरीर और वैवाहिक प्रतीकों से तय होती है। जिन्हें छात्रों के मीम्स और पोस्टर्स में अश्लीलता दिखाई दे गई उन्हें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सहित तमाम नेताओं, उद्योगपतियों, धर्माचार्यों के बयानों में अश्लीलता दिखाई क्यों नहीं देती है ? गजब का लाजिक है कि उन्हें अपनों के द्वारा दी गई अश्लील गालियां प्रवचन लगती है और जं जी द्वारा दी गई गालियों से दुख होता है। जबकि गालियां किसी भी तरफ से दी जाएं उन्हें कभी भी स्वीकार्य नहीं किया जा सकता है और ना ही उन्हें किसी भी तर्क वितर्क से जस्टीफाई किया जा सकता है।
अश्वनी बडगैया अधिवक्ता
स्वतंत्र पत्रकार
