नई दिल्ली (न्यूज़ वार्ता): ज्यूडिशियल काउंसिल के चेयरमैन श्री राजीव अग्निहोत्री ने देश में बढ़ते भ्रष्टाचार पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि भ्रष्टाचार आज भारत के सामने खड़ी सबसे गंभीर चुनौतियों में से एक बन चुका है। यह केवल सरकारी संस्थाओं के कार्यकलापों को प्रभावित नहीं कर रहा है, बल्कि करोड़ों भारतीयों के अधिकारों, अवसरों और जीवन की गुणवत्ता पर भी सीधा प्रभाव डाल रहा है। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार भारतीय जनता का खून चूस रहा है और राष्ट्र के भविष्य के लिए सबसे बड़ा खतरा बनकर उभरा है।

अपने वक्तव्य में श्री अग्निहोत्री ने कहा कि भारत की मेहनतकश जनता राष्ट्र निर्माण में निरंतर और अथक योगदान दे रही है, लेकिन भ्रष्टाचार की जड़ें इतनी गहरी हो चुकी हैं कि विकास का वास्तविक लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक नहीं पहुँच पा रहा है। गरीब, किसान, मजदूर, छोटे व्यापारी, युवा और मध्यमवर्गीय परिवार इस समस्या से सबसे अधिक प्रभावित हैं। सरकारी योजनाओं, सार्वजनिक सेवाओं और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में व्याप्त भ्रष्टाचार नागरिकों के विश्वास और संस्थाओं की विश्वसनीयता को लगातार कमजोर कर रहा है।

उन्होंने आगे कहा कि जब किसी व्यक्ति को अपने वैध अधिकार या सार्वजनिक सेवा प्राप्त करने के लिए रिश्वत देने पर मजबूर होना पड़ता है, तो यह केवल आर्थिक अपराध नहीं बल्कि उसके संवैधानिक अधिकारों का भी उल्लंघन है। भ्रष्टाचार योग्य व्यक्तियों को अवसरों से वंचित करता है, ईमानदार अधिकारियों का मनोबल गिराता है तथा समाज में अन्याय और असमानता का वातावरण पैदा करता है।

श्री अग्निहोत्री ने जोर देकर कहा कि भ्रष्टाचार के दुष्परिणाम केवल आर्थिक नुकसान तक सीमित नहीं हैं। यह सुशासन को कमजोर करता है, आर्थिक विकास में बाधा उत्पन्न करता है, निवेश को हतोत्साहित करता है तथा सार्वजनिक संस्थाओं की विश्वसनीयता को नुकसान पहुँचाता है। भ्रष्टाचार के कारण नष्ट होने वाला प्रत्येक रुपया शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं, आधारभूत संरचना, रोजगार सृजन और सामाजिक कल्याण जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों से छिन जाता है। अंततः इस व्यवस्था की विफलता का बोझ आम नागरिक को ही उठाना पड़ता है।

उन्होंने कहा कि समावेशी और सतत विकास के लक्ष्य को प्राप्त करने में भ्रष्टाचार एक बड़ी बाधा बन चुका है। भारत के पास अपार प्रतिभा, संसाधन और संभावनाएँ हैं, लेकिन भ्रष्टाचार के कारण अनेक नागरिक देश की प्रगति का पूरा लाभ प्राप्त नहीं कर पा रहे हैं। पक्षपात, अधिकारों के दुरुपयोग और जवाबदेही की कमी की संस्कृति लोकतांत्रिक समाज की नींव माने जाने वाले निष्पक्षता, पारदर्शिता और समान अवसर के सिद्धांतों के लिए गंभीर खतरा है।

ज्यूडिशियल काउंसिल के चेयरमैन ने भ्रष्टाचार के विरुद्ध लड़ाई में जन-जागरूकता और नागरिक भागीदारी को मजबूत करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार से लड़ना केवल सरकारी एजेंसियों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसके लिए नागरिकों, सामाजिक संगठनों, शैक्षणिक संस्थानों, मीडिया तथा जनहित के प्रति प्रतिबद्ध सभी वर्गों की सामूहिक भागीदारी आवश्यक है। जनता की सतर्कता और पारदर्शिता ही ऐसी व्यवस्था का निर्माण कर सकती है जो ईमानदारी और दक्षता के साथ लोगों की सेवा करे।

श्री अग्निहोत्री ने भ्रष्टाचार-निरोधक कानूनों के कठोर क्रियान्वयन और संस्थागत जवाबदेही को मजबूत बनाने की आवश्यकता पर भी बल दिया। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से आग्रह किया कि भ्रष्टाचार में लिप्त पाए जाने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध उनकी पद, प्रतिष्ठा या प्रभाव की परवाह किए बिना त्वरित और निष्पक्ष कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उनके अनुसार कानून से ऊपर कोई नहीं होना चाहिए और सार्वजनिक पद का उपयोग सदैव जनता के हित में होना चाहिए।

अपने वक्तव्य के समापन में श्री अग्निहोत्री ने कहा कि भ्रष्टाचार केवल वित्तीय अपराध नहीं है, बल्कि यह न्याय, समानता और करोड़ों नागरिकों की आकांक्षाओं पर सीधा हमला है। उन्होंने प्रत्येक भारतीय से एक पारदर्शी, जवाबदेह और भ्रष्टाचार-मुक्त राष्ट्र के निर्माण के मिशन में सहयोग देने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा, “भ्रष्टाचार अवसरों की चोरी करता है, संस्थाओं को कमजोर बनाता है और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को खतरे में डालता है। यदि भारत को एक विकसित, समृद्ध और शक्तिशाली राष्ट्र के रूप में अपनी पूर्ण क्षमता प्राप्त करनी है, तो भ्रष्टाचार का दृढ़ संकल्प, ईमानदारी और सामूहिक प्रयासों के साथ मुकाबला करना होगा। समय आ गया है कि प्रत्येक नागरिक इस बुराई के विरुद्ध एकजुट होकर खड़ा हो और देश के भविष्य की रक्षा करे।”

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