(suryansh times बालाघाट)
उर्स में विभिन्न राज्यों के लोग होते हैं शामिल
आपको बताए कि इस दरगाह शरीफ में उर्स मुबारक के खास मौके पर केवल स्थानीय ही नहीं बल्कि अन्य जिलों व राज्यों के विभिन्न समुदाय के लोग शामिल होते हैं।इस वर्ष भी महाराष्ट्र एवं छत्तीसगढ़ के विभिन्न शहरों से श्रद्धालु इस सालाना उर्स में शामिल होंगे।वही दरगाह शरीफ में उर्स मुबारक के मौके पर रात में कव्वाली व लंगर ए आम का इंतजाम किया जाएगा।
श्रद्धालु करते हैं मनके की खोज
वैनगंगा नदी तट पर स्थित कलंदर बाबा मेहर अली शाह दरगाह को मनका टेकरी दरगाह के नाम से जाना जाता है। श्रद्धालुओं की मान्यता के अनुसार दरगाह परिसर में मनके यानी एक खास किस्म के कीमती रत्नों की बरसात होती है।इस दरगाह शरीफ में आने वाले लोगों की मन की मुरादे पूरी हो जाती है।इसीलिए दरगाह शरीफ का नाम मनका टेकरी रखा गया है। जहां प्रतिवर्ष आयोजित होने वाले उर्स मुबारक पर लोगों का तांता लगा रहता है।वहीं दरगाह में पहुंचने वाले लोगों को अक्सर मनको की खोज करते देखा जाता है ।ऐसा माना जाता है कि जिसे मनका मिल जाता है वह खुद किस्मत होता है और उसकी मन की मुराद पूरी होती है
उर्स आयोजन के लिए नहीं लिया जाता किसी से चंदा
कलंदर बाबा मोहर अली शाह के उर्स मुबारक की
विशेषता यह है कि यह कार्यक्रम के लिए किसी से
किसी प्रकार का चंदा नहीं लिया जाता बल्कि इस आस्ताने से जुड़े लोग अपने अपने स्तर पर सहयोग कर आयोजन को संपन्न कराते हैं। यह सिलसिला पिछले कई वर्षों से चला आ रहा है, बताया जाता है कि कलंदर बाबा मोहर अली शाह द्वारा किसी से कोई चंदा नही लिए जाने को कहा गया था लिहाजा उनकी आज्ञा का परिपालन यह किया जाता है और किसी से कोई चंदा नहीं लिया जाता।
कौमी एकता का दिखता है मंजर
मनका टेकरी स्थित दरगाह शरीफ उन आस्तानो में
शुमार है जहां कौमी एकता का मंजर आप देख सकते हैं, यहां किसी के भी आने जाने में कोई मनाही नहीं है।सभी धर्म और मजहब के लोग यहां आते हैं और शीश झुकाते हैं फिर चाहे वह हिंदू हो या मुसलमान।यहां अक्सर सामाजिक सद्भाव का नजारा देखने को मिलता है।यही कारण बड़ी तादाद में लोग इस आस्ताने से जुड़े हुए हैं और खिदमत को अंजाम देते हैं।
कौमी एकता का प्रतीक है दरबार- रमेश जैतवार
उर्स मुबारक पर आयोजित कार्यक्रमों को लेकर की गई चर्चा के दौरान मनका टेकरी दरगाह में खिदमत को अंजाम दे रहे जयारीन रमेश कुमार जैतवार ने बताया कि यह दरबार कौमी एकता का प्रतीक है।दूर दूर से लोग यहां पर माथा टेकने आते हैं और अपने मन की मुरादे पाते हैं।16 अप्रैल को यहां सालाना उर्स है जिसमें केवल बालाघाट नगर ही नहीं बल्कि विभिन्न राज्यों के लोग आते हैं और विभिन्न कार्यक्रमों में शामिल होते हैं।इस आस्ताने में मन की मुराद पूरी होती है।उर्स मुबारक पर यह मनको की बरसात होती है।अक्सर लोग उर्स मुबारक पर आकर यहां मनके चुनते है। यहां से कई लोगों को फैज मिला है। हम भी कई वर्षों से इस दरबार से जुड़े हैं। यहीं पर सेवा करते हैं जहां कोई भी आयोजन के लिए चंदा नहीं लिया जाता। इस दरबार में लोग मन मांगी मुरादें पाते हैं।
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